माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
झारखंड सरकारl
प्रसंग- स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग झारखंड स्टेट आरोग्य सोसायटी के पत्रांक 04(अo)MSBY-01/2022-459.
द्वारा- उपायुक्त महोदय, संबंधित जिला
महाशय,
पत्र के माध्यम से राज्य सरकार के गैर शैक्षणिक संवर्ग के डॉक्टर को उनके ड्यूटी के बाद भी प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाई गई है lसाथ ही उनसे डिक्लेरेशन मांगा गया है कि वह किसी भी प्राइवेट अस्पताल से जुड़े नहीं हैl वह केवल अपना क्लीनिक चला सकते हैं और उसमें भी किसी मरीज को भर्ती नहीं कर सकतेl महोदय को कुछ तथ्यों की तरफ ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा l
1)गैर शैक्षणिक संवर्ग में सेवा योगदान के निर्धारित अहर्ता मे प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक से संबंधित कोई प्रावधान नहीं हैl तब वर्षों बाद कोई अधिकारी नया से रूल रेगुलेशन कैसे बना सकता है?
2) विभाग जिस सरकारी नौकरी में नन प्रैक्टिसिंग अलाउंस नहीं देती, उसमें सरकारी चिकित्सक को उनकी ड्यूटी के पश्चात प्राइवेट प्रैक्टिस को कैसे रोक सकती है?
3)माननीय उच्चतम न्यायालय के अनुसार मरीज को इलाज का मौलिक अधिकार दिया गया है lकोई भी चिकित्सक किसी भी मरीज को, उसके गंभीर अवस्था में इलाज देने से मना नहीं कर सकताl विभाग के इस आदेश के द्वारा सरकारी चिकित्सकों को मरीजों की भर्ती करने का अधिकार नहीं है lयह न्यायालय के वर्डिक्ट का अवहेलना है और मरीज के मौलिक अधिकार का हनन हैl यह आदेश असंवैधानिक हैl
4) क्लीनिक में सीरियस मरीज, जिनकी जान बचाने के लिए इमरजेंसी एडमिशन एवं ऑपरेशन जरूरी है, इस आदेश के अनुसार डॉक्टर उपलब्ध होने और सारी योग्यता रखते हुए भी उस मरीज को भर्ती नहीं कर सकताl यह आदेश अव्यवहारिक हैl
5) राज्य में चिकित्सकों की कमी हैl एक तरफ हमारे राज्य के माननीय मुख्यमंत्री महोदय इस कमी को पूरा करने के लिए प्रयासरत हैं lअभी कैबिनेट में चिकित्सकों की रिटायरमेंट की उम्र सीमा बढ़ाने संबंधी फाइल पारित की हैl चिकित्सक अधिक से अधिक सरकारी सेवा में आए- इसका प्रयास होना चाहिए l दूसरी तरफ विभाग द्वारा सरकारी चिकित्सकों को हतोत्साहित किया जा रहा है l ऐसे में सभी सरकारी चिकित्सक सामूहिक इस्तीफा का मन बना रहे हैंl
6)संभव है कि यह आदेश व्यक्ति विशेष द्वारा बनाया गया हो lइसमें उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श नहीं लिया गया हो- इसलिए संगठन विभाग के उच्च अधिकारियों से इसकी समीक्षा कर इसे अविलंब वापस लेने की मांग करती हैl
7) झारखंड सरकार सुदूरवर्ती क्षेत्रों में गांव के गरीब व्यक्ति तक गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का प्रयास कर रही हैl केंद्र सरकार और राज्य सरकार re-powering of health services in Jharkhand पर सेमिनार आयोजित कर रही है और विभाग अपने नकारात्मक सोच से चिकित्सकों मे प्राइवेट प्रैक्टिस से संबंधित भय का माहौल तैयार कर रही है चिकित्सकों को आंदोलन और सामूहिक इस्तीफे के लिए विवश कर रही हैl
8) आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री योजना के अंतर्गत अस्पतालों के करोड़ों की राशि बकाया हैl ऐसे में झारखंड स्टेट आरोग्य समिति द्वारा 15:07:2016 के पुराने आदेश को पुनः जीवित कर मुद्दे को भटकाने का प्रयास किया जा रहा हैl स्पष्ट शब्दों में आयुष्मान के मरीज को रिजेक्ट कर दिया गया यह कह कर कि as per letter.no.459 government doctors are not allowed to do private practice from 5th August. - यानी विभाग एक तरफ बकाया राशि नहीं दे रही और दूसरी तरफ सरकारी डॉक्टर को नौकरी से इस्तीफा देने पर मजबूर कर रही हैl
9) रेडियोलॉजिस्ट एनएसथेटिस्ट पैथोलॉजिस्ट अपनी ड्यूटी के पश्चात अपने क्लीनिक में केवल ओपीडी के लिए अधिकृत हैंl इन लोगों की ओपीडी क्या होगी ?विभाग ने इन बिंदुओं पर कभी गौर ही नहीं कियाl यानी जिन लोगों के द्वारा यह आदेश बनाया गया उन्हें मेडिकल साइंस की जानकारी नहीं हैl
झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने इस आदेश के विरोध में दिनांक 06:08 2022 को एक राज्य स्तरीय बैठक कीl जिसमें सभी 24 जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित हुएl इस आदेश पर चर्चा की गई और इसे व्यवहारिक और संवैधानिक तुगलकी फरमान की संज्ञा दी गई l चिकित्सकों ने इसका जोरदार विरोध किया और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया की:-
विभाग को यह आदेश पूर्णत: वापस लेना होगा और इसके लिए 15 दिन की अवधि निर्धारित की गईl अगर इस अवधि में यानी 21:08 : 2022 तक इस आदेश को वापस नहीं लिया जाता है, तो झारखंड राज्य के सभी चिकित्सक अनिश्चितकालीन हड़ताल को विवश होंगे और किसकी संपूर्ण जवाबदेही विभाग की होगीl ज्ञात हो कि अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवा बाधित नहीं होगीl
झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ अपने सदस्यों के मौलिक अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए समर्पित है साथ ही अपने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था समृद्ध , सुदृढ़ और गुणवत्ता युक्त हो, इसके लिए संकल्पित हैl सरकार के स्वास्थ संबंधित सभी नीति निर्धारण में एवं उसके कार्यान्वयन मे झासा ने हमेशा सहयोग किया है और सदैव तत्पर रहेगाl
अतः आपसे अनुरोध है कि आप हस्तक्षेप करें और विभाग इस आदेश को वापस ले यह सुनिश्चित करने की कृपा करेंl
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